टीम इंडिया का केएल राहुल के प्रति रवैया देखकर मन में एक सवाल जरूर उठता है: क्या राहुल भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे बदकिस्मत क्रिकेटर हैं?

इतने प्रतिभाशाली होने के बावजूद टीम में उनकी भूमिका तय नजर नहीं आती। वनडे में उनका प्रदर्शन ऐसा है कि उनकी जगह पक्की होनी चाहिए। इसके बावजूद उनके स्थान पर बार-बार सवाल उठते हैं। एक-दो पारियों में नाकाम होते ही उन्हें टीम से बाहर करने की बातें शुरू हो जाती हैं।

राहुल वनडे में ओपनिंग से लेकर नंबर 7 तक हर स्थान पर बल्लेबाजी कर चुके हैं। इसके बावजूद उनका औसत 50 से ऊपर है। लगातार अलग-अलग भूमिकाओं में ढलते हुए ऐसा प्रदर्शन करना उनकी काबिलियत दिखाता है। बल्लेबाजी की प्रतिभा के मामले में उनकी चर्चा विराट कोहली जैसे खिलाड़ी के साथ की जा सकती है, हालांकि दोनों की करियर उपलब्धियां अलग हैं।

अब शुभमन गिल के ताजा बयान से संकेत मिला है कि राहुल को एक बार फिर अपने बल्लेबाजी क्रम में बदलाव के लिए तैयार रहना होगा।

केएल राहुल का बल्लेबाजी क्रम फिर रहेगा लचीला

न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से पहले गिल ने कहा कि भारत के शीर्ष चार बल्लेबाजों के स्थान तय हैं। हालांकि, नंबर 5 और नंबर 6 पर राहुल और अक्षर पटेल मैच की स्थिति के हिसाब से ऊपर-नीचे हो सकते हैं।

गिल ने बताया कि शीर्ष चार बल्लेबाज दाएं हाथ के हैं। अगर टीम को बाएं हाथ के बल्लेबाज की जरूरत होगी, तो अक्षर को राहुल से पहले भेजा जा सकता है। दूसरी परिस्थितियों में राहुल पहले बल्लेबाजी करने आ सकते हैं।

इससे एक सीधा सवाल उठता है: बल्लेबाजी क्रम में बदलाव की गुंजाइश सिर्फ शीर्ष चार के बाद ही क्यों है?

स्पिन के खिलाफ बाएं हाथ के बल्लेबाज की जरूरत उस समय भी पड़ सकती है, जब नंबर 4 के बल्लेबाज को उतरना हो। फिर भी उस स्थान को सुरक्षित रखा गया है, जबकि राहुल का बल्लेबाजी क्रम बदलने का विकल्प खुला है।

बाएं हाथ की ऑर्थोडॉक्स स्पिन के खिलाफ अक्षर की आक्रामक बल्लेबाजी उपयोगी हो सकती है। लेकिन अगर गेंदबाज के हिसाब से बल्लेबाज को ऊपर भेजना है, तो यही तरीका ऊपरी क्रम में क्यों नहीं अपनाया जा सकता? शीर्ष चार को निश्चित स्थान देना और राहुल से लगातार तालमेल बैठाने की उम्मीद करना नाइंसाफी लगता है।

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नाबाद शतक ने दिखाया कि ज्यादा गेंदें मिलने पर क्या कर सकते हैं राहुल

वेस्टइंडीज के खिलाफ अपनी पिछली वनडे पारी में राहुल ने फिर दिखाया था कि पर्याप्त गेंदें मिलने पर वह क्या कर सकते हैं।

उस सीरीज में उन्हें सिर्फ एक बार बल्लेबाजी मिली और उन्होंने 87 गेंदों पर नाबाद 129 रन बनाए। इस शानदार पारी में उन्होंने पहले बड़ा स्कोर खड़ा करने और फिर तेजी से रन बनाने की अपनी क्षमता दिखाई।

राहुल तेज गेंदबाजी और स्पिन, दोनों के अच्छे खिलाड़ी हैं। बाएं हाथ के बल्लेबाज की जरूरत पड़ते ही उन्हें नीचे भेजने से मध्य ओवरों की उन्हीं चुनौतियों का सामना करने की उनकी क्षमता नजरअंदाज हो सकती है।

उनका हालिया शतक उन्हें क्रीज पर समय देने की दलील मजबूत करता है। जो बल्लेबाज पारी बना भी सकता हो और उसे प्रभावी तरीके से खत्म भी कर सकता हो, उसका बेहतर इस्तेमाल करने के लिए स्थिर बल्लेबाजी क्रम मददगार होना चाहिए।

हर बार राहुल को ही क्यों करना पड़े बदलाव?

नाराजगी सिर्फ इस बात की नहीं है कि राहुल नंबर 6 पर खेल सकते हैं। समस्या यह है कि उनकी भूमिका बार-बार बदलती है, जबकि दूसरे बल्लेबाजों को स्पष्ट भरोसा मिलता है।

हर स्थान की जरूरत अलग होती है। कभी जल्दी विकेट गिरने के बाद पारी संभालनी होती है, कभी मध्य ओवरों में नियंत्रण रखना होता है और कभी आते ही बड़े शॉट खेलने पड़ते हैं। राहुल से बार-बार इन भूमिकाओं के हिसाब से ढलने की उम्मीद की जाती है। फिर भी नाकाम होने पर उनकी अपनी जगह पर सवाल उठने लगते हैं।

इस अनिश्चितता के बावजूद उनका वनडे औसत करीब 51 है। यह प्रदर्शन उन्हें एक तय भूमिका देने का आधार होना चाहिए। उनकी अलग-अलग परिस्थितियों में खेलने की क्षमता को लगातार बल्लेबाजी क्रम बदलने की छूट नहीं समझना चाहिए।

इतना शानदार रिकॉर्ड और बेहतरीन वनडे औसत होने के बावजूद राहुल को टीम इंडिया में अपनी जगह पक्की करने के लिए विकेटकीपिंग भी करनी पड़ती है।

बाएं हाथ के बल्लेबाज की जरूरत वाला गिल का तर्क मूल सवाल का जवाब नहीं देता। अगर बल्लेबाजी क्रम में लचीलापन जरूरी है, तो शीर्ष चार को इससे बाहर क्यों रखा गया है? राहुल भी अपनी भूमिका को लेकर उतनी ही स्पष्टता के हकदार हैं।

क्या तय भूमिका राहुल को और ऊंचाई तक पहुंचा सकती थी?

यह तर्क मजबूत है कि एक तय बल्लेबाजी क्रम और ऊपर खेलने के ज्यादा मौके मिलने से राहुल का वनडे करियर और बेहतर हो सकता था।

60 से ऊपर का औसत एक ऐसी संभावना है जिस पर चर्चा की जा सकती है। हालांकि, अलग परिस्थितियों में उनके आंकड़े क्या होते, यह कोई निश्चित तौर पर नहीं बता सकता। बात यह है कि बदलती जिम्मेदारियों के बीच भी 50 से ऊपर का औसत रखने वाला खिलाड़ी असाधारण क्षमता रखता है।

ज्यादा स्थिरता मिलने पर शायद उनका रिकॉर्ड उन्हें महान वनडे बल्लेबाजों के बीच और मजबूती से खड़ा करता। इसके बजाय चर्चा बार-बार उनकी भूमिका में एक और बदलाव तथा एक और प्रयोग पर लौट आती है।

आखिर कब तक राहुल को ही अपने तय स्थान से समझौता करना पड़ेगा? अपने प्रदर्शन से उन्होंने स्पष्ट बल्लेबाजी भूमिका पाने का हक कमाया है।

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