अभी कुछ दिनों पहले क्रिकेट फैंस खुशी से झूम उठे थे, जब उन्होंने भारतीय टीम के सेटअप में रजत पाटीदार का नाम वापस देखा था। RCB फैंस भी काफी खुश थे, क्योंकि जिस तरह का प्रदर्शन पाटीदार कर रहे थे, उसे देखते हुए उन्हें लगता था कि वह इस मौके के हकदार हैं।
राइजिंग स्टार्स एशिया कप के लिए पाटीदार को इंडिया A का उपकप्तान बनाया गया था। तिलक वर्मा को कप्तानी सौंपी गई थी, जबकि वैभव सूर्यवंशी और अभिषेक शर्मा भी टीम में शामिल थे।
लेकिन अब वह खुशी निराशा में बदल गई है। पाटीदार ने अपनी चोट को मैनेज करने की जरूरत बताते हुए टीम से नाम वापस ले लिया है। उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा है कि आगे उन्हें 50 ओवर की टीमों के लिए चयन में शामिल न किया जाए। उनकी जगह आयुष बडोनी को चुना गया है।
शानदार फॉर्म के बावजूद रजत पाटीदार ने नाम वापस लिया
यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब पाटीदार अच्छा खेल रहे हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया A के खिलाफ इंडिया A के लिए प्रभावित किया था। इसके बाद घरेलू क्रिकेट में भी उनकी अच्छी फॉर्म जारी रही और IPL में भी उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है।
यही वजह है कि यह मौका उनके लिए अहम था। वह रन बनाकर इंडिया A के सेटअप में लौट रहे थे और उन्हें उपकप्तानी की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी मिली थी। लेकिन एशिया कप में इस चयन का फायदा उठाकर आगे बढ़ने के बजाय अब उन्होंने नाम वापस ले लिया है।
क्या इस फैसले से भारतीय टीम में भविष्य के चयन पर असर पड़ सकता है?
बड़ी चिंता यह है कि नाम वापस लेने का यह फैसला चयनकर्ताओं को क्या संदेश दे सकता है।
पाटीदार रणजी ट्रॉफी खेल रहे हैं और ऑस्ट्रेलिया A के खिलाफ 50 ओवर के मुकाबलों में भी खेले थे। ऐसे में चयन होने के बाद इंडिया A के टूर्नामेंट से हटना उनकी उपलब्धता और प्राथमिकताओं को लेकर सवाल खड़े कर सकता है।
चयन के नजरिए से चिंता सीधी है। एक खिलाड़ी को मौके के साथ नेतृत्व की जिम्मेदारी भी दी जाती है, लेकिन बाद में वह खुद को अनुपलब्ध कर देता है। अगर चयनकर्ता इसे चोट मैनेज करने के लिए जरूरी फैसले के बजाय एक मौका गंवाने के तौर पर देखते हैं, तो भारतीय टीम में उनकी वापसी की राह मुश्किल हो सकती है।
ईशान किशन से तुलना इस बात की चेतावनी है कि उपलब्धता से जुड़े सवाल किस तरह चयन की बड़ी बहस का हिस्सा बन सकते हैं। इससे यह साबित नहीं होता कि चयनकर्ता पाटीदार के मामले में भी वैसी ही प्रतिक्रिया देंगे। लेकिन इससे समझ आता है कि इस फैसले का असर एक टूर्नामेंट से आगे क्यों जा सकता है।
यह भी संभव है कि इसका असर केवल 50 ओवर के क्रिकेट तक सीमित न रहे। अगर चयनकर्ता उनके नाम वापस लेने को नकारात्मक नजरिए से देखते हैं, तो T20 क्रिकेट के लिए उनके चयन की संभावनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। वे सवाल कर सकते हैं कि जिस खिलाड़ी ने पहले मिले मौके से खुद को अलग कर लिया, उसे दोबारा मौका दिया जाए या नहीं।
यह चयन पर पड़ सकने वाला संभावित असर है, चयनकर्ताओं का कोई घोषित फैसला नहीं। हालांकि, पाटीदार के लिए चिंता यही है कि इस फैसले से उठने वाले सवालों का जवाब शायद केवल अच्छे प्रदर्शन से न मिल पाए।
