भारत ने न्यूजीलैंड सीरीज में काफी कमाल किया है। आशंका थी कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और अतिरिक्त उछाल के कारण भारतीय टीम को मुश्किल होगी। टी20 सीरीज में बल्लेबाजी के अनुकूल पिचें मिली थीं, लेकिन उम्मीद थी कि वनडे की पिचें ज्यादा कठिन परीक्षा लेंगी।

हालांकि, भारतीय टीम ने सबको चौंकाया है। अपने ही हालात में न्यूजीलैंड के बल्लेबाज भारतीय गेंदबाजों के सामने संघर्ष कर रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजहों में से एक हैं 6 फीट 5 इंच लंबे तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़, जिनकी रफ्तार और तीखी उछाल ने मेजबान टीम को परेशान किया है।

गुरनूर बराड़ ने दोनों वनडे में दिखाया दम

ऑकलैंड में खेले गए पहले वनडे में बराड़ ने 9.2 ओवर में 44 रन देकर 3 विकेट लिए। उन्होंने अपने स्पेल में टिम सीफर्ट और टॉम लैथम को आउट किया और न्यूजीलैंड को 185 रन पर समेटने में अहम भूमिका निभाई।

वेलिंगटन में दूसरे वनडे में उन्होंने इससे भी बेहतर गेंदबाजी की। बराड़ ने 10 ओवर में 2 मेडन के साथ 30 रन देकर 4 विकेट झटके। उनके शिकार लैथम, ग्लेन फिलिप्स, मिचेल सैंटनर और नाथन स्मिथ बने।

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मुकाबला ओवर मेडन दिए गए रन विकेट
पहला वनडे, ऑकलैंड 9.2 0 44 3
दूसरा वनडे, वेलिंगटन 10 2 30 4

इस तरह उन्होंने दो मुकाबलों में 74 रन देकर 7 विकेट अपने नाम किए। आंकड़ों से आगे देखें तो न्यूजीलैंड के अनुभवी बल्लेबाजों को उन्होंने जिस तरह असहज किया है, वह भारत के लिए खास तौर पर उत्साह बढ़ाने वाला है।

उनकी उछाल का सामना करना इतना मुश्किल क्यों है?

लंबे कद के कारण बराड़ काफी ऊंचाई से गेंद छोड़ते हैं। इसके साथ लगातार 140 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से गेंदबाजी करने की क्षमता उनकी शॉर्ट पिच गेंदों को मुश्किल बनाती है। अतिरिक्त उछाल वाली पिचों पर जब गेंद उम्मीद से ज्यादा ऊपर उठती है, तो बल्लेबाजों के पास खुद को उसके मुताबिक ढालने का समय कम होता है।

दूसरे वनडे में लैथम और फिलिप्स के विकेट इस तालमेल का उदाहरण थे। एक बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और दूसरे दाएं हाथ के, लेकिन लगभग एक जैसी शॉर्ट पिच गेंदबाजी की रणनीति ने बराड़ को दोनों विकेट दिलाए।

फिलिप्स टी20 सीरीज में बड़ा खतरा बने थे और भारत के लिए उन्हें आउट करना मुश्किल हो रहा था। इस बार बराड़ ने उन्हें खाता भी नहीं खोलने दिया। भारत को अक्सर परेशान करने वाले लैथम भी उछाल का सामना करते हुए अपना विकेट गंवा बैठे।

इसके बाद बराड़ ने क्रीज पर जम चुके सैंटनर को आउट किया और स्मिथ का विकेट भी लिया। इस स्पेल में उन्होंने दिखाया कि वह साझेदारी तोड़ने के साथ पारी आगे बढ़ने पर भी विकेट निकाल सकते हैं।

SENA की परिस्थितियों के लिए उम्मीद जगाता हथियार

SENA का मतलब दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया है। इन देशों की परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं, लेकिन रफ्तार और तीखी उछाल देने वाली पिचों पर बराड़ की स्वाभाविक खूबियां भारत को विकेट लेने का अहम विकल्प दे सकती हैं।

न्यूजीलैंड में उनका प्रदर्शन मिडिल ओवर्स में एक उपयोगी भूमिका की ओर इशारा करता है। जब बल्लेबाज पारी संभालने या रनगति बढ़ाने की कोशिश करते हैं, तब गेंद को तेजी से ऊपर उठाने की उनकी क्षमता उन्हें जमने से रोक सकती है।

इन दो स्पेल से यही उम्मीद जगी है कि भारत को ऐसा तेज गेंदबाज मिल सकता है, जो उछाल का इस्तेमाल करके लगातार विकेट निकाले—उन बल्लेबाजों के खिलाफ भी, जो इन परिस्थितियों से अच्छी तरह परिचित हैं।

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बेहतर नियंत्रण तय करेगा अगला कदम

बल्लेबाजी के अनुकूल पिचों पर बराड़ के पास अभी सुधार की काफी गुंजाइश है। उछाल वाली पिच पर परेशान करने वाली उनकी वही शॉर्ट ऑफ लेंथ गेंदें सपाट पिच पर बल्लेबाज के लिए सुविधाजनक ऊंचाई तक आ सकती हैं।

अतिरिक्त उछाल नहीं मिलने पर बल्लेबाज उनकी गेंदों को भांपकर आक्रमण कर सकते हैं। ऐसी लेंथ पर विकेट मिल सकते हैं, लेकिन पिच के मुताबिक बदलाव किए बिना लगातार वही गेंदबाजी करना महंगा भी पड़ सकता है।

बराड़ के पास कद और रफ्तार पहले से हैं। अगली चुनौती लाइन-लेंथ पर नियंत्रण बेहतर करना और यह सीखना है कि अपनी रणनीति कब बदलनी है। ये सुधार उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में भरोसेमंद विकेट लेने वाला गेंदबाज बना सकते हैं।