मोहम्मद आमिर ने ब्रिटिश नागरिक के रूप में अफगानिस्तान प्रीमियर लीग के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। इसके बाद चर्चा तेज हो गई है कि अब वह IPL ऑक्शन के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। इंग्लैंड के घरेलू क्रिकेट में उन्हें पहले ही घरेलू खिलाड़ी का दर्जा मिल चुका है, जिसके चलते उनके IPL खेलने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

लेकिन ब्रिटिश पासपोर्ट मिलने से उनका स्पॉट फिक्सिंग का इतिहास नहीं मिट जाता। उनका अतीत और पाकिस्तानी खिलाड़ियों से जुड़ी संवेदनशीलता को देखते हुए IPL में उन्हें करार मिलना बेहद मुश्किल नजर आता है।

मोहम्मद आमिर की IPL उम्मीदों के सामने फिक्सिंग का सवाल

भ्रष्टाचार के खिलाफ BCCI का रुख स्पष्ट है—जीरो टॉलरेंस। श्रीसंत के मामले में बोर्ड की कार्रवाई दिखाती है कि एक भारतीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी को भी अनुशासनात्मक कार्रवाई से छूट नहीं मिली।

दिल्ली की एक अदालत ने 2015 में श्रीसंत को आपराधिक मामले में आरोपमुक्त कर दिया था। हालांकि, इससे BCCI की अलग अनुशासनात्मक जांच के निष्कर्ष अपने आप रद्द नहीं हुए। बोर्ड ने शुरुआत में उनका आजीवन प्रतिबंध बरकरार रखा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद प्रतिबंध की अवधि घटाकर 7 साल कर दी गई।

प्रतिबंध खत्म होने और घरेलू क्रिकेट में वापसी करने के बावजूद श्रीसंत दोबारा IPL नहीं खेल पाए। उनका नाम 2022 की अंतिम ऑक्शन सूची में शामिल था, लेकिन किसी फ्रेंचाइजी ने उन्हें नहीं खरीदा। यानी एक भारतीय खिलाड़ी को दोबारा खेलने की पात्रता मिलने के बाद भी IPL में वापसी नहीं मिली।

आमिर की 2010 के लॉर्ड्स स्पॉट फिक्सिंग मामले में संलिप्तता ICC के एक ट्रिब्यूनल में साबित हुई थी, जिसके बाद उन पर 5 साल का प्रतिबंध लगाया गया। उन्होंने अपनी सजा पूरी की और क्रिकेट में वापसी भी की, लेकिन नागरिकता बदलने से उनके करियर का वह अध्याय खत्म नहीं हो जाता।

हमारा आकलन है कि कोई भी IPL फ्रेंचाइजी आमिर को खरीदने पर विचार तक नहीं करेगी, क्योंकि ऐसा करने से भारतीय प्रशंसकों का भरोसा टूटने का जोखिम होगा। किसी फ्रेंचाइजी के लिए अपने समर्थकों के बीच विश्वसनीयता बनाए रखना ऐसी जिम्मेदारी है, जो किसी खिलाड़ी की गेंदबाजी क्षमता से कहीं आगे जाती है।

पाकिस्तान के लिए खेलना एक और जटिलता

पहले सीजन के बाद से पाकिस्तानी खिलाड़ी IPL से बाहर रहे हैं। पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुके आमिर को साइन करने का मामला इसलिए और संवेदनशील हो जाता है।

ब्रिटिश नागरिकता के जरिए पहले IPL में प्रवेश का उदाहरण मौजूद है। पाकिस्तान के पूर्व ऑलराउंडर अजहर महमूद ब्रिटिश पासपोर्ट पर इस लीग में खेल चुके हैं। हालांकि, यह उदाहरण आमिर के फिक्सिंग इतिहास से जुड़ी अलग चिंताओं का समाधान नहीं करता।

रजिस्ट्रेशन कराना, ऑक्शन में शामिल होना और किसी टीम से करार मिलना तीन अलग-अलग चरण हैं। APL ड्राफ्ट में आमिर का नाम होना उस प्रक्रिया में उनकी भागीदारी की पुष्टि करता है। इससे यह साबित नहीं होता कि BCCI ने उन्हें IPL ऑक्शन के लिए स्वीकार कर लिया है या कोई फ्रेंचाइजी उन्हें खरीदने को तैयार है।