क्या खिलाड़ी हैं विराट कोहली। वह लगातार ऐसी उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं, जिन्हें देखकर क्रिकेट फैंस सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि एक बल्लेबाज बार-बार इतने असाधारण मानक कैसे स्थापित कर सकता है।
अगर कोहली को एक शब्द में समझाना हो, तो वह है प्रेरणा। उनकी सफलता की भूख उन लोगों को भी हौसला देती है, जिन्हें लगता है कि अब उनके पास देने के लिए कुछ नहीं बचा। क्रिकेट के महानतम बल्लेबाजों में अपनी जगह पक्की करने के बावजूद वह नए मुकाम हासिल करने के लिए पूरी दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं।
जिस उम्र में खिलाड़ियों से अक्सर उनके प्रदर्शन में गिरावट को लेकर सवाल होते हैं, उस उम्र में कोहली अपनी विरासत को और बड़ा बना रहे हैं। उनकी नई उपलब्धि एक खास क्षमता को सामने लाती है—उन परिस्थितियों में दबदबा बनाना, जो उनके शुरुआती क्रिकेट की परिस्थितियों से काफी अलग हैं।
विराट कोहली का SENA रिकॉर्ड बना असाधारण मिसाल
विराट कोहली दुनिया के एकमात्र बल्लेबाज हैं, जिनका चारों SENA देशों—दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया—में अलग-अलग वनडे बल्लेबाजी औसत 50 से ज्यादा है।
ईडन पार्क में न्यूजीलैंड के खिलाफ 51 गेंदों में 74 रन की पारी ने इस देश में उनका औसत 51.53 पहुंचा दिया। इसके साथ ही उन्होंने चारों देशों में यह शानदार उपलब्धि पूरी कर ली।
| देश | विराट कोहली का वनडे बल्लेबाजी औसत |
|---|---|
| दक्षिण अफ्रीका | 76.38 |
| इंग्लैंड | 51.48 |
| न्यूजीलैंड | 51.53 |
| ऑस्ट्रेलिया | 50.03 |
ये आंकड़े प्रत्येक देश में खेले गए वनडे मैचों में उनके बल्लेबाजी औसत के हैं।
चारों देशों में 50 से ज्यादा का औसत बनाए रखने के लिए असाधारण निरंतरता चाहिए। बल्लेबाज को अलग-अलग पिचों, मौसम और गेंदबाजी आक्रमण के अनुसार बार-बार खुद को ढालना पड़ता है। साथ ही लगातार दौरों पर प्रदर्शन भी करना होता है।
जो उपलब्धि SENA के अपने दिग्गज भी हासिल नहीं कर पाए
यहीं यह उपलब्धि और भी खास हो जाती है। रिकी पोंटिंग, जैक्स कैलिस और एबी डिविलियर्स जैसे दिग्गज भी चारों देशों में इस मानक तक नहीं पहुंच पाए।
पोंटिंग ऑस्ट्रेलिया में क्रिकेट खेलते हुए बड़े हुए। कैलिस और डिविलियर्स ने दक्षिण अफ्रीका में अपना खेल विकसित किया। शुरुआती क्रिकेट, घरेलू करियर और अनगिनत अभ्यास सत्रों के दौरान वे अपने देश की परिस्थितियों में मिलने वाली गति और उछाल से परिचित हुए।
कोहली ने भारत में अपना खेल विकसित किया। इन देशों में पहुंचने पर उन्हें उन परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना पड़ा, जो उनके शुरुआती क्रिकेट से अलग थीं।
इसके बावजूद उन्होंने हर देश में 50 से ज्यादा का वनडे औसत बनाए रखा है। उन घरेलू दिग्गजों की गुणवत्ता के बारे में सोचिए, जो चारों देशों में एक साथ यह उपलब्धि हासिल नहीं कर सके। तभी समझ आता है कि यह करना कितना मुश्किल है।
SENA की परिस्थितियां बेहतरीन बल्लेबाजों की कमजोरियां भी सामने ला सकती हैं। अतिरिक्त उछाल उठती हुई गेंद के खिलाफ नियंत्रण की परीक्षा लेता है, जबकि स्विंग और सीम मूवमेंट के सामने सटीक फैसले जरूरी होते हैं। सफल होने के लिए अनुशासन बनाए रखते हुए आक्रमण करने की क्षमता चाहिए।
कोहली की उपलब्धि दिखाती है कि उन्होंने अपने खेल को कितनी अच्छी तरह ढाला है। भारत में विकसित की गई अपनी बल्लेबाजी की क्षमताओं को उन्होंने चार चुनौतीपूर्ण विदेशी परिस्थितियों में सफल बनाया है।
इस मामले में सचिन तेंदुलकर भी काफी पीछे रहे
क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर भी इस खास पैमाने पर कोहली से काफी पीछे रहे।
| देश | विराट कोहली का वनडे औसत | सचिन तेंदुलकर का वनडे औसत |
|---|---|---|
| ऑस्ट्रेलिया | 50.03 | 34.67 |
| इंग्लैंड | 51.48 | 43.79 |
| न्यूजीलैंड | 51.53 | 39.09 |
| दक्षिण अफ्रीका | 76.38 | 38.23 |
तेंदुलकर का वनडे औसत चारों देशों में 50 से नीचे रहा। कोहली हर देश में आगे हैं। सबसे बड़ा अंतर दक्षिण अफ्रीका में है, जहां उनका औसत तेंदुलकर से लगभग दोगुना है।
यह तुलना इस उपलब्धि के स्तर को समझाती है। महान वनडे करियर होने के बावजूद हर SENA देश में इस स्तर की लगातार सफलता मिलना तय नहीं होता।
35 के बाद भी अपनी विरासत को बड़ा बना रहे कोहली
कोहली ने यह मुकाम ऐसी पारी के साथ हासिल किया, जिसने उनके आक्रामक इरादे भी दिखाए। अपने 38वें जन्मदिन से एक दिन पहले ईडन पार्क में उन्होंने 51 गेंदों में 145.10 के स्ट्राइक रेट से 74 रन बनाए।
उनके इरादों में कोई कमी नहीं दिखी। भारत के सफल रन चेज में निर्णायक भूमिका निभाने के साथ उन्होंने अपने शानदार करियर में एक और उपलब्धि जोड़ ली।
यही वजह है कि उनका सफर इतना प्रेरणादायक है। हमेशा याद रखे जाने के लिए पर्याप्त उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद वह और बेहतर प्रदर्शन की इच्छा के साथ तैयारी करते हैं और मैदान पर उतरते हैं।
परिस्थितियों के अनुसार ढलने की कला, निरंतरता बनाए रखने का अनुशासन और लगातार बेहतर बनने की भूख—यही कोहली की महानता के पीछे की खूबियां हैं। उनकी विरासत इसलिए बड़ी होती जा रही है, क्योंकि उनकी महत्वाकांक्षा ठहरने को तैयार नहीं है।
