चेन्नई फैंस को समझ में नहीं आ रहा है कि CSK आखिर करना क्या चाहती है। ऐसा भी लग रहा है कि टीम अपने खराब प्रदर्शन से इतनी हताश हो चुकी है कि फैसलों का असर सोचे बिना कदम उठा रही है। चेन्नई को कोई खिलाड़ी चाहिए तो वह उसे हर कीमत पर हासिल करने के लिए तैयार नजर आती है और विरोधी टीमें इसी मजबूरी का फायदा उठा रही हैं।

सनराइजर्स हैदराबाद के साथ हुए ट्रेड में यही चिंता सामने आई थी। अब दिल्ली कैपिटल्स के साथ बातचीत में भी CSK के सामने ऐसा सौदा स्वीकार करने की नौबत आ सकती है, जिससे उसकी जरूरतें पूरी नहीं होंगी।

SRH के साथ ट्रेड में CSK को घाटा क्यों दिख रहा है?

CSK ने लियाम लिविंगस्टन और जैक एडवर्ड्स को अपनी टीम में लिया, जबकि नाथन एलिस और खलील अहमद को SRH भेज दिया। सवाल यह है कि इस सौदे में दोनों टीमों को किस तरह के खिलाड़ी मिले।

लिविंगस्टन और एडवर्ड्स की चेन्नई की प्लेइंग इलेवन में जगह पक्की नहीं है। उनके हालिया प्रदर्शन भी ऐसे नहीं रहे हैं कि दोनों को बिना किसी सवाल के अंतिम एकादश में शामिल कर लिया जाए।

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दूसरी तरफ SRH को दो ऐसे गेंदबाज मिले हैं, जिनके लिए उसकी पहली पसंद की टीम में स्पष्ट भूमिका नजर आती है। एलिस दुनिया के बेहतरीन डेथ ओवर गेंदबाजों में शामिल हैं, जबकि खलील नई गेंद से गेंदबाजी करने वाले मजबूत भारतीय विकल्पों में से एक हैं।

चेन्नई ने पारी के दो अहम चरणों में असर डालने वाले गेंदबाज दिए और बदले में ऐसे विदेशी खिलाड़ी लिए, जिनकी जगह अभी तय करनी होगी। क्रिकेट के लिहाज से यह सौदा CSK के लिए घाटे का नजर आता है।

दिल्ली कैपिटल्स भी CSK को ट्रेड में बड़ा झटका दे सकती है

दिल्ली के साथ प्रस्तावित सौदे ने शुरुआत में चेन्नई के फैंस को उम्मीद दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत में डेवाल्ड ब्रेविस और नूर अहमद को दिल्ली भेजने के बदले अक्षर पटेल और आशुतोष शर्मा को CSK में लाने की योजना शामिल थी।

ब्रेविस और नूर दोनों मैच विनर हैं और पिछले दो सीजन में चेन्नई के लिए अहम प्रदर्शन कर चुके हैं। दोनों को छोड़ना बड़ा फैसला होगा। बदले में CSK को ऐसे खिलाड़ी चाहिए, जो उसकी खास समस्याओं का समाधान करें।

अक्षर भारतीय स्पिन ऑलराउंडर की जरूरत पूरी करेंगे, जबकि आशुतोष फिनिशिंग को मजबूत करेंगे। इन दोनों का एक साथ मिलना चेन्नई को अपने दो महत्वपूर्ण खिलाड़ी छोड़ने की ठोस वजह देगा।

लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली आशुतोष की जगह समीर रिजवी को शामिल करना चाहती है और CSK इस पर जोर दे रही है कि उसे आशुतोष ही चाहिए। चेन्नई को एक फिनिशर की जरूरत है, सिर्फ बल्लेबाजी का एक और विकल्प नहीं।

CSK आशुतोष के लिए दबाव बना रही है, लेकिन दिल्ली की बातचीत दूसरे ट्रेड पर है

CSK जहां आशुतोष को सौदे में शामिल करने के लिए दिल्ली पर दबाव बना रही है, वहीं कैपिटल्स उनके लिए अलग ट्रेड तलाश रही है। क्रिकबज के मुताबिक, गुजरात टाइटंस और लखनऊ सुपर जायंट्स संभावित ट्रेड पार्टनर हैं और दिल्ली बदले में एक तेज गेंदबाज चाहती है।

यानी दोनों टीमों की प्राथमिकताएं अलग हैं। चेन्नई आशुतोष से अपनी फिनिशिंग की समस्या दूर करना चाहती है। दिल्ली उन्हें CSK के सौदे में शामिल करने के बजाय उनके बदले अपना तेज गेंदबाजी आक्रमण मजबूत करना चाहती है।

यहीं चेन्नई की स्थिति मुश्किल हो जाती है। अगर दिल्ली आशुतोष का ट्रेड गुजरात या लखनऊ के साथ पूरा कर लेती है, तो वह CSK को नहीं मिलेंगे। इसके बाद चेन्नई को अक्षर वाले प्रस्तावित सौदे में आगे बढ़ने के लिए रिजवी से संतोष करना पड़ेगा।

जब दिल्ली के पास अपनी टीम की जरूरत पूरी करने का दूसरा रास्ता मौजूद है, तो सिर्फ CSK का दबाव पर्याप्त नहीं हो सकता।

अक्षर को लेने की चेन्नई की जिद दिल्ली को फायदा दे रही है

अक्षर को लेने के लिए CSK की कोशिश समझ में आती है। रविंद्र जडेजा पहले ही टीम छोड़ चुके हैं और प्रशांत वीर वाला प्रयोग चेन्नई को वह समाधान नहीं दे पाया, जिसकी उसे उम्मीद थी।

उसे जडेजा की भूमिका निभाने वाला विकल्प चाहिए। अक्षर भारत के प्रमुख स्पिन ऑलराउंडर्स में शामिल हैं और इस समय उस भूमिका के लिए एक बेहतर विकल्प नजर आते हैं।

लेकिन चेन्नई की यही जल्दबाजी बातचीत में दिल्ली को बढ़त देती है। वह आशुतोष के अलग ट्रेड से तेज गेंदबाज लेने की कोशिश कर सकती है और चेन्नई से अक्षर के साथ रिजवी को स्वीकार करने के लिए कह सकती है।

CSK के लिए इसका मतलब एक जरूरत पूरी करने के लिए दूसरी पर समझौता करना होगा। यह समझौता कितना सही है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि रिजवी उसकी बल्लेबाजी में वास्तव में क्या जोड़ते हैं।

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समीर रिजवी से CSK की फिनिशिंग की समस्या दूर नहीं होती

समीर रिजवी को अपनी पारी की शुरुआत में अच्छी तेज गेंदबाजी के खिलाफ परेशानी होती है, खासकर शॉर्ट गेंदों पर। इसलिए वह CSK की फिनिशिंग वाली जरूरत के लिए सही विकल्प नहीं हैं, क्योंकि अंतिम ओवरों में आमतौर पर तेज गेंदबाज ही गेंदबाजी करते हैं।

एक फिनिशर को लगभग आते ही इन गेंदबाजों पर आक्रमण करने के लिए तैयार रहना पड़ता है। उसके पास जमने का ज्यादा समय नहीं होता और शॉर्ट गेंदों के खिलाफ कमजोरी विरोधी टीम को दबाव बनाने का स्पष्ट रास्ता दे देती है।

चेन्नई के पास पहले से कई ऐसे बल्लेबाज हैं, जो मिडिल ओवरों में स्पिन पर आक्रमण कर सकते हैं। रिजवी को जोड़ने से उसकी वास्तविक जरूरत पूरी होने के बजाय उसी भूमिका वाला एक और खिलाड़ी टीम में आ जाएगा।

इसीलिए आशुतोष शर्मा उसका मुख्य लक्ष्य हैं। CSK को ऐसा फिनिशर चाहिए, जो अंतिम ओवरों में तुरंत असर डाल सके। दिल्ली के साथ बातचीत में आशुतोष पर उसका जोर इसी वजह से है।

अगर दिल्ली आशुतोष को किसी तेज गेंदबाज के बदले गुजरात या लखनऊ भेज देती है, तो रिजवी को स्वीकार करने के बाद भी चेन्नई की फिनिशिंग की समस्या बनी रहेगी। अक्षर को हासिल करने के लिए वह ब्रेविस और नूर को छोड़ देगी, लेकिन दूसरा वह खिलाड़ी नहीं मिलेगा जिसकी उसे वास्तव में जरूरत है।