भारत वेस्टइंडीज के खिलाफ वह मुकाबला हार गया, जिसे आखिरी 3 ओवरों में जीतने का उसके पास अच्छा मौका था। 352 रनों का बड़ा लक्ष्य देने के बावजूद भारतीय टीम 10 गेंद शेष रहते मैच हार गई और मुकाबले के सबसे अहम समय पर कप्तान शुभमन गिल का एक फैसला बेहद महंगा साबित हुआ।
47 ओवर के बाद मुकाबला बेहद रोमांचक स्थिति में था। वेस्टइंडीज को आखिरी 18 गेंदों में 29 रन चाहिए थे। शाई होप क्रीज पर सेट जरूर थे, लेकिन काफी लंबी पारी खेल चुके थे, जबकि दूसरे छोर पर गुडाकेश मोती गेंद को सही तरीके से टाइम नहीं कर पा रहे थे।
भारत के पास वेस्टइंडीज पर दबाव बनाने का अच्छा मौका था।
सबसे अहम बात यह थी कि शुभमन गिल के पास मोहम्मद सिराज के ओवर बचे हुए थे।
सिराज और डेब्यू कर रहे अंशुल कंबोज, दोनों के 2-2 ओवर बाकी थे। ऐसे में 48वें ओवर के लिए भारतीय कप्तान के पास स्पष्ट विकल्प मौजूद था।
लेकिन हैरानी की बात यह रही कि गिल ने गेंद कंबोज को थमा दी।
यहीं से मुकाबला पूरी तरह बदल गया।
सिराज क्यों दिख रहे थे बेहतर विकल्प?
उस समय तक सिराज मैच में भारत के सबसे भरोसेमंद तेज गेंदबाज रहे थे। उन्होंने 8 ओवर में 52 रन दिए थे और वेस्टइंडीज के खतरनाक और शानदार फॉर्म में चल रहे बल्लेबाज जॉन कैंपबेल को आउट भी किया था।
आंकड़ों से भी ज्यादा अहम इस परिस्थिति में सिराज का इंटरनेशनल अनुभव था।
वह भारत के लिए कई बार दबाव वाली परिस्थितियों में गेंदबाजी कर चुके हैं और इस मैच में भी बाकी भारतीय तेज गेंदबाजों के मुकाबले अपनी लाइन और लेंथ पर बेहतर नियंत्रण दिखा रहे थे।
वहीं अंशुल कंबोज की स्थिति बिल्कुल अलग थी।
वह अपना ODI डेब्यू कर रहे थे और शुरुआती 8 ओवरों में करीब 60 रन दे चुके थे। उन्हें अपनी लाइन और लेंथ पर नियंत्रण रखने में परेशानी हो रही थी और तब तक उन्हें कोई विकेट भी नहीं मिला था।
18 गेंदों में 29 रन बचाते समय भारत को तुरंत विकेट की जरूरत भी नहीं थी। टीम को मुख्य रूप से एक कसे हुए ओवर की जरूरत थी, जिससे जरूरी रन रेट और बढ़ता और पूरा दबाव वापस वेस्टइंडीज पर चला जाता।
इसी वजह से गिल का फैसला और भी हैरान करने वाला था।
अंशुल कंबोज के 48वें ओवर ने पलट दिया मैच
गिल ने 48वें ओवर के लिए कंबोज को गेंद थमाई और वेस्टइंडीज ने तुरंत इस मौके का फायदा उठाया।
पहली 2 गेंदों पर सिंगल आए, लेकिन तीसरी गेंद मुकाबले का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बन गई।
दबाव में कंबोज ने नो-बॉल डाल दी, जिस पर कुल 5 रन आए और वेस्टइंडीज को फ्री हिट भी मिल गई।
भारत ने पिछले कुछ ओवरों में जो दबाव बनाया था, वह लगभग तुरंत खत्म हो गया।
इसके बाद वेस्टइंडीज ने कंबोज पर हमला बोल दिया। पूरे ओवर का स्कोरिंग क्रम था:
1, 1, 5nb, 4, 1, 4, 6
48वें ओवर में कुल 22 रन आ गए।
सिर्फ एक ओवर पहले वेस्टइंडीज को 18 गेंदों में 29 रन चाहिए थे और भारत मुकाबले में पूरी तरह बना हुआ था। लेकिन कंबोज के ओवर के बाद लगभग पूरा समीकरण ही खत्म हो गया।
यही वह पल था जब मुकाबला भारत के हाथ से निकल गया।
कंबोज ने अपने डेब्यू मैच में 9 ओवर में 82 रन देकर कोई विकेट नहीं लिया।
शुभमन गिल का फैसला पड़ा महंगा
यही वजह है कि गिल के इस फैसले पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यह सिर्फ एक गेंदबाज के महंगे ओवर की बात नहीं थी। उस ओवर से पहले मैच की परिस्थिति भी बेहद महत्वपूर्ण थी।
गिल के पास सिराज जैसा अनुभवी इंटरनेशनल तेज गेंदबाज उपलब्ध था। सिराज उस दिन भारत के बाकी तेज गेंदबाजों से बेहतर गेंदबाजी कर रहे थे, कैंपबेल का महत्वपूर्ण विकेट ले चुके थे और उनके 2 ओवर अभी भी बाकी थे।
दूसरी तरफ एक ऐसा डेब्यूटेंट था, जिसका मैच पहले से मुश्किल जा रहा था और जिसने इंटरनेशनल स्तर पर इससे पहले इस तरह का दबाव झेला ही नहीं था।
इसके बावजूद गिल ने मैच के शायद सबसे महत्वपूर्ण ओवर के लिए कंबोज को चुना।
इसका परिणाम भारत के लिए बेहद खराब रहा।
वेस्टइंडीज को जहां 18 गेंदों में 29 रन चाहिए थे, वहीं एक ओवर में 22 रन आने के बाद मुकाबला पूरी तरह उनके नियंत्रण में चला गया। वेस्टइंडीज ने आखिरकार 48.2 ओवर में 352/5 बनाकर 10 गेंद शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया।
भारत की हार के पीछे एक से ज्यादा कारण थे, लेकिन निर्णायक समय तक टीम के पास मुकाबला जीतने का मौका मौजूद था। इसलिए 48वें ओवर के लिए गेंदबाज का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण था।
सिराज उपलब्ध थे। उनके पास अनुभव था। उन्होंने इतनी अच्छी गेंदबाजी भी की थी कि दबाव वाला ओवर उन्हें दिया जा सके।
लेकिन गिल ने कंबोज पर भरोसा किया और डेब्यूटेंट इस दबाव को संभाल नहीं पाए। 48वें ओवर में आए उन 22 रनों ने एक रोमांचक मुकाबले को वेस्टइंडीज के लिए आसान जीत में बदल दिया।
