मुश्किल बैटिंग पिचों पर संजू सैमसन का संघर्ष एक बार फिर टीम इंडिया के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। अगर भारतीय T20 टीम में संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी में से किसी एक को चुनना हो, तो क्या अब भारत को युवा वैभव पर भरोसा करना चाहिए?

संजू की काबिलियत पर कोई सवाल नहीं है। अच्छी बैटिंग पिच पर संजू किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को तबाह कर सकते हैं। हमने 2026 T20 वर्ल्ड कप में यह देखा और हाल ही में अफगानिस्तान के खिलाफ भी देखा। जब गेंद आसानी से बल्ले पर आती है और गेंदबाजों को पिच से ज्यादा मदद नहीं मिलती, तब संजू ऐसी पारी खेल सकते हैं जिसकी बराबरी दुनिया के बहुत कम बल्लेबाज कर सकते हैं।

चिंता तब शुरू होती है जब परिस्थितियां मुश्किल हो जाती हैं।

मुश्किल पिचों पर संजू सैमसन का संघर्ष

हाल के समय में मुश्किल बैटिंग परिस्थितियों में संजू के स्कोर में एक पैटर्न देखने को मिला है।

आयरलैंड के खिलाफ

  • 5 रन, 4 गेंद
  • 0 रन, 1 गेंद

इंग्लैंड के खिलाफ

  • 1 रन, 7 गेंद
  • 27 रन, 14 गेंद

एशियन गेम्स

  • vs जापान: 9 रन, 7 गेंद
  • vs श्रीलंका: 7 रन, 9 गेंद
  • vs पाकिस्तान: 2 रन, 4 गेंद

एशियन गेम्स ने इस बहस को और दिलचस्प बना दिया है। धीमी पिचों पर, जहां टाइमिंग आसान नहीं रही, संजू जापान, श्रीलंका और पाकिस्तान तीनों के खिलाफ दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सके।

समस्या सिर्फ रन नहीं बनाने की नहीं रही है। जब गेंद आसानी से बल्ले पर नहीं आई, तब संजू असहज भी दिखाई दिए।

श्रीलंका के खिलाफ सेमीफाइनल में संजू ने 9 गेंदों में सिर्फ 7 रन बनाए। उसी पिच पर वैभव सूर्यवंशी ने 21 गेंदों में 38 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 180.95 रहा।

पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में भी संजू टाइमिंग के लिए संघर्ष करते दिखाई दिए और 4 गेंदों में सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए।

एक-दो मैच में कोई भी बल्लेबाज फेल हो सकता है। लेकिन मुश्किल परिस्थितियों में जब एक जैसा संघर्ष बार-बार दिखाई दे, तो टीम इंडिया को उस पर ध्यान देना होगा।

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बैटिंग ट्रैक पर किसी भी आक्रमण को तबाह कर सकते हैं संजू

इस बहस के दूसरे पहलू को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

जब परिस्थितियां संजू के खेल के अनुकूल होती हैं, तब वह किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को तबाह कर सकते हैं। T20 वर्ल्ड कप में उनकी पारियों ने दिखाया कि लय में आने के बाद वह क्या कर सकते हैं।

हाल ही में अफगानिस्तान के खिलाफ भी उन्होंने फॉर्म में वापसी करते हुए दो अर्धशतक लगाए।

यही काबिलियत संजू को खतरनाक T20 बल्लेबाज बनाती है। सवाल यह नहीं है कि उनमें गेंदबाजों पर हावी होने की क्षमता है या नहीं। वह क्षमता उनके पास निश्चित रूप से है।

बड़ा सवाल यह है कि जब पिच से गेंदबाजों को मदद मिलने लगे, तब क्या भारत संजू पर उतना ही भरोसा कर सकता है?

बड़े टूर्नामेंट हमेशा सपाट बैटिंग विकेट पर नहीं खेले जाएंगे। भारत को ऐसे बल्लेबाज चाहिए जो गेंद के रुककर आने, टर्न होने या उम्मीद से अलग उछाल मिलने पर भी खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढाल सकें।

यहीं संजू का हालिया संघर्ष चिंता पैदा करता है।

वैभव सूर्यवंशी भारत को देते हैं अलग विकल्प

यहीं वैभव सूर्यवंशी का दावा काफी मजबूत हो जाता है।

बैटिंग ट्रैक पर वैभव लगभग किसी भी बल्लेबाज जितने खतरनाक हो सकते हैं। उनका स्वाभाविक आक्रामक खेल शुरुआत से ही गेंदबाजों पर दबाव डाल सकता है।

लेकिन इस बहस में उनका सबसे बड़ा फायदा धीमी और टू-पेस पिचों पर उनका प्रदर्शन है।

एशियन गेम्स सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ 21 गेंदों में 38 रन इसकी बेहतरीन मिसाल है। बैटिंग आसान नहीं थी, फिर भी वैभव ने 180 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट से रन बनाए और भारत के लिए अहम पारी खेली।

जिम्बाब्वे सीरीज में भी उन्होंने दिखाया कि मुश्किल बैटिंग परिस्थितियों में वह खुद को ढाल सकते हैं।

वैभव अभी बेहद युवा हैं और उनका खेल अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है। इंग्लैंड की परिस्थितियों में उनके पहले अनुभव ने भी दिखाया कि तेज गेंदबाजी और अतिरिक्त उछाल के खिलाफ उन्हें अभी सुधार करना है।

लेकिन उन परिस्थितियों में वह उनका पहला दौरा था। उनके पास सीखने के लिए काफी समय है।

भारत अभी तक इतना जरूर देख चुका है कि धीमी और टू-पेस पिचों पर वैभव परिस्थितियों को जल्दी समझने के साथ अपना आक्रामक खेल भी पूरी तरह नहीं छोड़ते।

भारत को अलग-अलग परिस्थितियों में रन बनाने वाले बल्लेबाज चाहिए

भारतीय टीम मैनेजमेंट के लिए यह एक महत्वपूर्ण बात होनी चाहिए।

भारत को हर जगह बैटिंग के लिए आसान पिचें नहीं मिलने वाली हैं।

बड़े टूर्नामेंट में पिच धीमी या टू-पेस हो सकती है और तेज गेंदबाजों या स्पिनरों को मदद मिल सकती है। विरोधी टीमें भी जानती हैं कि भारत की विस्फोटक बैटिंग लाइनअप के प्रभाव को कम करने का एक तरीका ऐसी परिस्थितियां देना है जहां खुलकर शॉट खेलना मुश्किल हो।

इसलिए अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

आयरलैंड में संजू के 5 और 0, इंग्लैंड में 1 और 27, इसके बाद जापान के खिलाफ 9, श्रीलंका के खिलाफ 7 और पाकिस्तान के खिलाफ 2 रन मुश्किल परिस्थितियों में उनके प्रदर्शन को गंभीरता से देखने की वजह देते हैं।

सिर्फ इन पारियों के आधार पर यह साबित नहीं किया जा सकता कि संजू मुश्किल विकेट पर हमेशा संघर्ष करेंगे। क्रिकेट में ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।

लेकिन जब एक ही कमजोरी बार-बार दिखाई दे, तो चयनकर्ता उसे नजरअंदाज भी नहीं कर सकते।

अफगानिस्तान के खिलाफ वैभव को मिलना चाहिए था मौका

यही वजह है कि अफगानिस्तान के खिलाफ वैभव को मौका नहीं मिलना निराशाजनक था।

वहां बैटिंग के लिए अच्छी परिस्थितियां थीं, जहां उनका विस्फोटक खेल बेहद प्रभावी हो सकता था। छोटी बाउंड्री और अच्छी बैटिंग पिच वैभव को अपना पूरा आक्रामक खेल दिखाने का बेहतरीन मौका दे सकती थीं।

इसके बजाय भारत ने संजू के साथ बने रहने का फैसला किया और संजू ने उन परिस्थितियों का फायदा उठाते हुए दो अर्धशतक लगाए।

उन रनों का श्रेय संजू को मिलना चाहिए।

लेकिन भारत को ऐसी स्थिति से बचना होगा जहां संजू बैटिंग ट्रैक पर खूब रन बनाएं और उन्हीं पारियों के आधार पर अगला मौका आने पर वैभव को फिर टीम से बाहर रखा जाए।

अगर भारत वास्तव में वैभव को अपने भविष्य की T20 योजनाओं का अहम हिस्सा मानता है, तो उन्हें लगातार मौके मिलने चाहिए।

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अगर एक को चुनना हो तो वैभव का दावा मजबूत

यह बहस संजू सैमसन की प्रतिभा पर सवाल उठाने के बारे में नहीं है।

अपने दिन पर संजू किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को तबाह कर सकते हैं। उनकी सर्वश्रेष्ठ पारियां इसे पहले ही साबित कर चुकी हैं।

सवाल यह है कि आने वाले समय में टीम इंडिया को किस तरह के बल्लेबाज की जरूरत है।

वैभव युवा हैं और स्वाभाविक रूप से ज्यादा आक्रामक बल्लेबाज हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि धीमी और टू-पेस पिचों पर भी वह अपने आक्रामक अंदाज को बनाए रखने की क्षमता दिखा चुके हैं।

वैभव भी फेल होंगे। खासकर बेहतरीन तेज गेंदबाजी और अतिरिक्त उछाल वाली परिस्थितियों में उन्हें अपने खेल में सुधार करना होगा।

लेकिन उम्र उनके साथ है और उनके पास अपने खेल के इन हिस्सों को बेहतर बनाने के लिए काफी समय है।

दूसरी तरफ संजू अब एक अनुभवी अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाज हैं। उनके करियर के इस पड़ाव पर भारत को उनसे मुश्किल बैटिंग परिस्थितियों में भी जवाब चाहिए, सिर्फ उन पिचों पर नहीं जहां आक्रामक शॉट खेलना आसान हो।

अगर टीम इंडिया को आखिरकार एक स्थान के लिए संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी में से किसी एक को चुनना पड़ता है, तो चयनकर्ताओं के सामने बड़ा फैसला होगा।

धीमी और मुश्किल पिचों पर अब तक जो देखने को मिला है, उसके आधार पर वैभव ने अपना दावा काफी मजबूत किया है। भारत को उन्हें अलग-अलग मैचों में कभी-कभार मौका देकर आंकने के बजाय लगातार अवसर देने चाहिए।

भारत की लंबी अवधि की T20 योजनाओं को देखते हुए वैभव सूर्यवंशी इस मौके के हकदार हैं कि उन्हें लगातार अवसर देकर यह साबित करने दिया जाए कि क्या वह अलग-अलग परिस्थितियों में टीम इंडिया की जरूरत बन सकते हैं।