तीसरे वनडे में 351 रन बनाने के बावजूद भारत को वेस्टइंडीज के खिलाफ चौंकाने वाली हार का सामना करना पड़ा। इस हार को और भी चिंताजनक यह बात बनाती है कि लक्ष्य का पीछा करते समय वेस्टइंडीज के पास प्रभावी रूप से केवल नौ बल्लेबाज ही पूरी तरह उपलब्ध थे, लेकिन इसके बावजूद भारतीय गेंदबाजी आक्रमण इतने बड़े स्कोर को नहीं बचा पाया।
वेस्टइंडीज के बल्लेबाज जेवेल एंड्रयू चेज शुरू होने से पहले ही चोटिल हो गए थे और बहुत ज्यादा जरूरत पड़ने पर ही उनके बल्लेबाजी के लिए आने की संभावना थी। इसके बाद शेरफेन रदरफोर्ड को बेहद विवादित तरीके से कैच आउट दिया गया, जबकि रिप्ले में बल्ले और गेंद के बीच साफ गैप दिखाई दे रहा था।
इन मुश्किलों के बावजूद वेस्टइंडीज ने 352 रनों का लक्ष्य 48.2 ओवर में हासिल कर भारत को पांच विकेट से हरा दिया।
आखिर क्यों वेस्टइंडीज के पास प्रभावी रूप से केवल 'नौ बल्लेबाज' थे?
चेज शुरू होने से पहले ही वेस्टइंडीज को बड़ा झटका लग गया था।
जेवेल एंड्रयू को पारी की शुरुआत करनी थी, लेकिन उंगली में चोट लगने के कारण उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। इसके चलते कप्तान शाई होप को ओपनिंग करनी पड़ी। एंड्रयू की स्थिति ऐसी थी कि बहुत ज्यादा जरूरत पड़ने पर ही उनके बल्लेबाजी के लिए आने की संभावना थी।
इससे वेस्टइंडीज के उपलब्ध बल्लेबाजी विकल्प पहले ही कम हो गए थे।
इसके बाद शेरफेन रदरफोर्ड का बेहद विवादित विकेट आया।
रदरफोर्ड 24 रन बनाकर अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे, तभी नमन धीर की गेंद पर उन्हें कैच आउट दिया गया। रदरफोर्ड ने तुरंत रिव्यू लिया और रिप्ले में बल्ले और गेंद के बीच साफ गैप दिखाई दे रहा था।
वहीं बल्ला पैड के बेहद करीब था, जिससे UltraEdge पर आए स्पाइक की दूसरी वजह भी संभव दिखाई दे रही थी। इसके बावजूद हैरानी की बात यह रही कि थर्ड अंपायर ने सबूत को अलग तरीके से देखा और मैदानी अंपायर के फैसले को बरकरार रखा।
यह फैसला इसलिए और ज्यादा विवादित बन गया क्योंकि उपलब्ध रिप्ले में बल्ले और गेंद के बीच संपर्क दिखाई नहीं दे रहा था।
इस तरह वेस्टइंडीज को अपनी बल्लेबाजी में दो बड़े नुकसान झेलने पड़े। एंड्रयू चोट के कारण प्रभावी रूप से उपलब्ध नहीं थे, जबकि रदरफोर्ड को ऐसे फैसले पर पवेलियन लौटना पड़ा जो विजुअल एविडेंस से मेल खाता हुआ नहीं दिखाई दे रहा था।
इसके बावजूद भारत 351 रन नहीं बचा पाया।
KL Rahul और Rohit Sharma ने भारत को 351 तक पहुंचाया
भारत ने मुश्किल शुरुआत से वापसी करते हुए बड़ा स्कोर खड़ा किया था।
Shubman Gill सिर्फ 1 रन बनाकर आउट हो गए, जबकि Virat Kohli अपना खाता भी नहीं खोल पाए। इसके बाद Rohit Sharma ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 92 रनों की बेहतरीन पारी खेली।
Ruturaj Gaikwad ने भी 57 रनों का अहम योगदान दिया, जिसके बाद KL Rahul ने भारतीय पारी की पूरी जिम्मेदारी संभाल ली।
Rahul ने नाबाद 129 रन ठोके और भारत को 50 ओवर में 351/7 तक पहुंचाया। इतने बड़े स्कोर और चेज से पहले तथा उसके दौरान वेस्टइंडीज को लगे झटकों को देखते हुए भारत के पास मैच जीतने के लिए पर्याप्त रन दिखाई दे रहे थे।
लेकिन भारतीय गेंदबाज अपना काम पूरा नहीं कर पाए।
Shai Hope के नाबाद 162 ने भारत को किया बेबस
Shai Hope ने अपनी टीम को सबसे ज्यादा जरूरत के समय एक जबरदस्त पारी खेलकर दी।
वेस्टइंडीज के कप्तान ने 143 गेंदों में नाबाद 162 रन बनाए और एक ऐसे लक्ष्य का पीछा करते हुए अपनी टीम को जीत दिलाई, जो कागज पर बेहद मुश्किल दिखाई दे रहा था।
Amir Jangoo ने 67 रन बनाकर उनका शानदार साथ दिया, जबकि Keemo Paul ने महत्वपूर्ण 44 रन बनाए। विवादित तरीके से आउट होने से पहले Rutherford भी 24 रन बना चुके थे।
लेकिन इस चेज के असली हीरो Hope रहे। पारी के दौरान शारीरिक परेशानी से जूझने के बावजूद वह क्रीज पर टिके रहे और वेस्टइंडीज को लक्ष्य तक पहुंचाकर ही वापस लौटे।
वेस्टइंडीज ने आखिरकार 48.2 ओवर में लक्ष्य हासिल कर पांच विकेट से मुकाबला जीत लिया।
इस हार ने भारतीय गेंदबाजी की बड़ी कमजोरी उजागर की
351 रन बनाने के बाद हारना अपने आप में चिंता की बात है। लेकिन जिस परिस्थिति में भारत ने यह मुकाबला गंवाया, वह गेंदबाजी प्रदर्शन पर और भी बड़े सवाल खड़े करता है।
वेस्टइंडीज को 352 रन बनाने थे। जेवेल एंड्रयू चोटिल थे और प्रभावी रूप से बल्लेबाजी के लिए उपलब्ध नहीं थे। अच्छी बल्लेबाजी कर रहे रदरफोर्ड को विवादित तरीके से आउट दिया गया। दूसरी तरफ भारत के पूरे 11 खिलाड़ी मैदान पर मौजूद थे, फिर भी टीम वेस्टइंडीज को रोक नहीं पाई।
इससे सीधा सवाल भारतीय गेंदबाजी आक्रमण पर उठता है।
गुरनूर बरार के प्रदर्शन पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। टीम में आने के बाद वह महंगे साबित हुए हैं और जब पूरा गेंदबाजी आक्रमण विपक्षी बल्लेबाजों को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रहा हो, तब उनका चयन भी चर्चा का विषय बनता है।
हालांकि केवल एक गेंदबाज को इस हार के लिए जिम्मेदार ठहराना सही तस्वीर नहीं दिखाएगा। पूरी भारतीय गेंदबाजी यूनिट लगातार दबाव बनाने में नाकाम रही। Hope को चेज नियंत्रित करने का मौका मिलता रहा और दूसरे छोर से उनके साथी जरूरी योगदान देते रहे।
जब कोई टीम 351 रन बनाती है तो कम से कम उसके गेंदबाजों से यह उम्मीद की जाती है कि वे चेज को बेहद मुश्किल बनाएंगे। इसके उलट वेस्टइंडीज ने 10 गेंद बाकी रहते ही लक्ष्य हासिल कर लिया।
भारत ने भले ही तीन मैचों की वनडे सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली, लेकिन यह हार भारतीय गेंदबाजी को लेकर एक गंभीर सवाल छोड़ गई।
अगर 11 खिलाड़ियों वाली भारतीय टीम, प्रभावी रूप से नौ उपलब्ध बल्लेबाजों वाली वेस्टइंडीज टीम के खिलाफ 351 रन नहीं बचा सकती, तो इस गेंदबाजी प्रदर्शन पर गंभीर मंथन की जरूरत है।
