प्रेमानंद महाराज के आश्रम में विराट कोहली के जाने को लेकर चल रहा विवाद अब एक नया मोड़ ले चुका है। विराट कोहली के प्रवक्ता ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया था कि भारतीय क्रिकेट स्टार ने पहली बार आश्रम जाने के लिए पैसे लिए थे। लेकिन अब फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा कथित तौर पर अपने आरोप पर अड़े हुए हैं।
फलाहारी महाराज ने अब कथित तौर पर चुनौती दी है कि विराट कोहली के अकाउंट की जांच करवा ली जाए। उनका दावा है कि कोहली के पहली बार आश्रम आने के लिए पैसे दिए गए थे। हालांकि अभी तक कोई सार्वजनिक रूप से सत्यापित बैंक रिकॉर्ड, भुगतान से जुड़ा दस्तावेज या दूसरा सबूत सामने नहीं आया है, जिससे इस आरोप को साबित किया जा सके।
विराट कोहली को पैसे देने के अपने दावे पर कायम फलाहारी महाराज
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब फलाहारी महाराज ने आरोप लगाया कि विराट कोहली को पहली बार प्रेमानंद महाराज के आश्रम लाने के लिए करीब ₹5 करोड़ खर्च किए गए थे।
उनके आरोप के मुताबिक, बिल्डरों और प्रॉपर्टी से जुड़े लोगों ने इस दौरे को आयोजित करने और इससे जुड़े खर्चों को उठाने में भूमिका निभाई थी।
विराट कोहली के प्रवक्ता ने इस आरोप को मजबूती से खारिज करते हुए फलाहारी महाराज के दावों को “पूरी तरह झूठा, बेबुनियाद और तथ्यात्मक रूप से गलत” बताया था।
कोहली की तरफ से यह भी साफ किया गया कि वह प्रेमानंद महाराज के प्रति अपनी गहरी आस्था और श्रद्धा के कारण उनके पास जाते हैं।
हालांकि, फलाहारी महाराज कथित तौर पर अपना आरोप वापस लेने के लिए तैयार नहीं हैं।
अपने नए जवाब में उन्होंने कथित तौर पर कहा कि विराट कोहली के अकाउंट की जांच करवा ली जाए और जरूरत पड़े तो CBI को भी बुला लिया जाए। उन्होंने दावा किया कि आश्रम से जुड़े कई अनुयायियों के अकाउंट से कोहली को पैसे भेजे गए थे। इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ रकम नकद में दी गई थी।
ये फलाहारी महाराज द्वारा लगाए गए आरोप हैं और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वित्तीय सबूतों के जरिए स्वतंत्र रूप से साबित नहीं हुए हैं।
‘कोहली को बाद में लगा कि उन्होंने बहुत बड़ा पाप कर दिया’
फलाहारी महाराज का नया दावा केवल कथित भुगतान तक सीमित नहीं है।
उनके मुताबिक, प्रेमानंद महाराज से वास्तव में मिलने के बाद विराट कोहली की सोच बदल गई।
उन्होंने दावा किया कि जब कोहली ने प्रेमानंद महाराज के आसपास का माहौल देखा और वहां उन्हें शांति महसूस हुई, तो उन्हें लगा कि यहां आने के लिए पैसे लेना उनकी बहुत बड़ी गलती थी।
फलाहारी महाराज ने कथित तौर पर इसे इस तरह बताया कि कोहली को लगा कि उन्होंने बहुत बड़ा “पाप” कर दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि कोहली पर इतना गंभीर आरोप लगाने के बाद फलाहारी महाराज ने कथित तौर पर उसके बाद किए गए कामों के लिए पूर्व भारतीय कप्तान की तारीफ भी की।
दावा- कोहली ने जितना लिया, उससे कई गुना ज्यादा आश्रम को दिया
फलाहारी महाराज का दावा है कि अपनी कथित गलती का एहसास होने के बाद विराट कोहली ने पहले ली गई कथित रकम से कई गुना ज्यादा पैसा आश्रम को दिया।
उन्होंने इससे भी आगे बढ़कर दावा किया कि विराट कोहली आज भी आश्रम की गतिविधियों में आर्थिक सहयोग करते हैं। उनके मुताबिक, आश्रम में श्रद्धालुओं के लिए चलने वाले भंडारे में भी कोहली का पैसा लगाया जाता है।
इस तरह फलाहारी महाराज के आरोप में एक ही कहानी के दो बिल्कुल अलग हिस्से सामने आते हैं। एक तरफ उनका दावा है कि विराट कोहली ने पहली बार आश्रम आने के लिए पैसे लिए थे। दूसरी तरफ उनका यह भी कहना है कि बाद में कोहली की प्रेमानंद महाराज के प्रति सच्ची श्रद्धा विकसित हुई और उन्होंने आश्रम को कथित तौर पर उससे कई गुना ज्यादा वापस दिया।
₹5 करोड़ के सवाल का अभी कोई साबित जवाब नहीं
फिलहाल ₹5 करोड़ वाले मूल आरोप को एक साबित तथ्य मानना संभव नहीं है।
फलाहारी महाराज अपने दावे पर कायम हैं और कथित तौर पर मामले की जांच करवाने तक की चुनौती दे रहे हैं। दूसरी तरफ विराट कोहली के प्रवक्ता साफ तौर पर इस बात से इनकार कर चुके हैं कि कोहली ने पैसे लिए थे। कोहली की तरफ से यही कहा गया है कि प्रेमानंद महाराज के साथ उनका जुड़ाव पूरी तरह उनकी आस्था और श्रद्धा के कारण है।
यह सवाल भी उठता है कि विराट कोहली जैसे दुनिया के सबसे बड़े और व्यावसायिक रूप से बेहद सफल खिलाड़ियों में शामिल व्यक्ति केवल ₹5 करोड़ के लिए ऐसा दौरा क्यों करेंगे। हालांकि सिर्फ इस आधार पर आरोप को सही या गलत साबित नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि इस दावे को सच मानने के लिए मजबूत सबूत की जरूरत होगी।
एक बात साफ दिखाई देती है कि प्रेमानंद महाराज के साथ कोहली का जुड़ाव केवल एक मुलाकात तक सीमित नहीं रहा। विराट कोहली और अनुष्का शर्मा कई बार प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे हैं, जो उनकी इस बात को मजबूती देता है कि आध्यात्मिक गुरु के साथ उनका जुड़ाव वास्तविक आस्था से है।
अगर फलाहारी महाराज का यह अलग दावा भी कभी साबित होता है कि कोहली ने बाद में आश्रम और वहां चलने वाले भंडारे में बड़ा आर्थिक योगदान दिया, तो यह कहानी का बिल्कुल अलग पहलू सामने रखेगा। इससे यह दिखाई देगा कि कोहली ने अपने संसाधनों का इस्तेमाल आश्रम में आने वाले श्रद्धालुओं और वहां सेवा पाने वाले लोगों की मदद के लिए किया।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण अंतर यही है कि फलाहारी महाराज का दावा है कि विराट कोहली ने शुरुआत में पैसे लिए थे और उन्होंने अकाउंट की जांच कराने तक की चुनौती दी है, जबकि कोहली की तरफ से इस आरोप को पूरी तरह खारिज किया गया है। सत्यापित वित्तीय सबूत के बिना इस आरोप को साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।
