दिल्ली कैपिटल्स ने IPL 2027 से पहले टी नटराजन को सनराइजर्स हैदराबाद में ट्रेड कर दिया है। बदले में लेग स्पिनर जीशान अंसारी दिल्ली से जुड़े हैं। इस सौदे से दिल्ली के पैसे जरूर बचेंगे, लेकिन नटराजन जैसी दुर्लभ खूबियों वाले भारतीय तेज गेंदबाज को छोड़ना बड़ी गलती है, जिसका नुकसान टीम को करीबी मुकाबलों में उठाना पड़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, नटराजन ₹5 करोड़ की कॉन्ट्रैक्ट फीस पर SRH में लौट रहे हैं। उनका पिछला कॉन्ट्रैक्ट ₹10.75 करोड़ का था। आर्थिक फायदा साफ है, लेकिन क्रिकेट के लिहाज से इस फैसले को सही ठहराना मुश्किल है। दिल्ली ने ऐसे विशेषज्ञ गेंदबाज को जाने दिया है, जिसकी जगह भरना आसान नहीं होगा।
SRH में टी नटराजन का रिकॉर्ड बताता है उनकी मैच जिताने की क्षमता
नटराजन ने 2020 से 2024 के बीच SRH के लिए खेले गए पांच सीजन में 55 मैचों में 65 विकेट लिए। यह रिकॉर्ड बताता है कि उन्हें छोड़ने से पहले दिल्ली को एक खराब सीजन से आगे भी देखना चाहिए था।
| IPL सीजन | मैच | विकेट | इकॉनमी रेट |
|---|---|---|---|
| 2020 | 16 | 16 | 8.02 |
| 2021 | 2 | 2 | 8.63 |
| 2022 | 11 | 18 | 9.44 |
| 2023 | 12 | 10 | 9.11 |
| 2024 | 14 | 19 | 9.06 |
| कुल | 55 | 65 | — |
उन्होंने 2020 में 8.02 की इकॉनमी से 16 विकेट लिए। इसके बाद 2022 में उनके नाम 18 विकेट रहे। विकेटों के लिहाज से उनका सबसे अच्छा सीजन 2024 था, जब उन्होंने 24.47 की औसत से 19 विकेट हासिल किए।
उसी सीजन में उन्होंने दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 4/19 का मैच जिताऊ स्पेल भी डाला था। उन्हें अपनी टीम में शामिल करने से पहले दिल्ली उनकी क्षमता खुद देख चुकी थी।
ये आंकड़े उनकी पूरे सीजन की गेंदबाजी के हैं, सिर्फ डेथ ओवर्स के नहीं। इनसे पता चलता है कि पारी के मुश्किल चरणों में गेंदबाजी की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने कई अच्छे सीजन दिए।
पिछला सीजन खराब था, लेकिन दिल्ली को नटराजन की काबिलियत पर भरोसा रखना चाहिए था
IPL 2026 में नटराजन का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, खासकर उनके अनुभव को देखते हुए।
| IPL 2026 के आंकड़े | प्रदर्शन |
|---|---|
| मैच | 10 |
| गेंदबाजी किए गए ओवर | 31.5 |
| विकेट | 5 |
| दिए गए रन | 356 |
| गेंदबाजी औसत | 71.20 |
| इकॉनमी रेट | 11.18 |
| सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन | 3/29 |
10 मैचों में सिर्फ 5 विकेट और 11 से ज्यादा की इकॉनमी उम्मीदों से काफी नीचे थी। इन आंकड़ों पर सवाल उठने चाहिए थे, लेकिन इनके आधार पर उनकी स्थापित काबिलियत की अहमियत खत्म नहीं हो जाती।
चोटों ने नटराजन के करियर को प्रभावित किया है। उनकी असरदार गेंदबाजी फिटनेस और लय पर निर्भर करती है। हालांकि, खास कौशल वाले अनुभवी तेज गेंदबाजों को मुश्किल दौर में अक्सर समर्थन की जरूरत होती है। दिल्ली की छोटी बाउंड्री और बल्लेबाजी के अनुकूल परिस्थितियों में गलती की गुंजाइश भी बहुत कम रहती है।
अहम सवाल यह था कि क्या दिल्ली के पास उनकी भूमिका के लिए कोई बेहतर भारतीय विकल्प था। उनकी जगह भरने वाला गेंदबाज सुनिश्चित किए बिना उन्हें छोड़ने से एक खिलाड़ी का खराब सीजन पूरे गेंदबाजी आक्रमण की समस्या बन सकता है।
टी नटराजन का ट्रेड दिल्ली को इतना महंगा क्यों पड़ सकता है?
नटराजन आज भी भारत के घरेलू क्रिकेट में शीर्ष डेथ ओवर विशेषज्ञों में शामिल हैं। उनकी अहमियत एक दुर्लभ मेल में है: भारतीय बाएं हाथ का तेज गेंदबाज, यॉर्कर, कटर और हर गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश कर रहे बल्लेबाजों का सामना करने का अनुभव।
बाएं हाथ का एंगल गेंदबाजी आक्रमण में विविधता लाता है। उनकी यॉर्कर बल्लेबाज को खुलकर बल्ला घुमाने की जगह नहीं देती, जबकि मददगार पिच पर कटर रफ्तार में बदलाव का विकल्प देती है। आखिरी ओवरों में इन गेंदों को सही जगह डालने के लिए नियंत्रण, आत्मविश्वास और अनुभव चाहिए।
दिल्ली किसी दूसरे भारतीय तेज गेंदबाज को खरीदकर यह नहीं मान सकती कि वह भी यही भूमिका निभा लेगा। नई गेंद से विकेट लेना या लंबे फॉर्मेट में सफल होना किसी गेंदबाज को अपने आप T20 का अच्छा डेथ ओवर गेंदबाज नहीं बनाता।
ऑक्शन इस समस्या को और मुश्किल बनाता है। अच्छे भारतीय तेज गेंदबाज कम ही उपलब्ध होते हैं, क्योंकि फ्रेंचाइजी आमतौर पर अपने मजबूत विकल्पों को रिटेन कर लेती हैं। टीमें जानती हैं कि IPL में संतुलन बनाने के लिए ऐसे गेंदबाज कितने जरूरी हैं, इसलिए उन्हें रिलीज करने से बचती हैं।
अगर कोई उपयुक्त गेंदबाज ऑक्शन में आता भी है, तो कई फ्रेंचाइजी उसे खरीदने की होड़ में उतर सकती हैं। इसलिए ज्यादा पैसे होने से यह गारंटी नहीं मिलती कि दिल्ली नटराजन जैसी काबिलियत वाला विकल्प हासिल कर लेगी।
उनके भारतीय होने से दिल्ली को विदेशी खिलाड़ियों के चयन में भी लचीलापन मिलता था। उनकी जगह विदेशी डेथ ओवर गेंदबाज खिलाने पर वह स्थान इस्तेमाल होगा, जिससे बल्लेबाजी या गेंदबाजी के किसी दूसरे हिस्से को मजबूत किया जा सकता था।
दिल्ली ने अपने तेज गेंदबाजी आक्रमण में मुश्किल खाली जगह बना दी है
नटराजन के जाने से मुकेश कुमार, माधव तिवारी और आकिब नबी की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। दिल्ली के पास भारतीय तेज गेंदबाजी के विकल्प अभी भी हैं, लेकिन यह नहीं माना जा सकता कि उनमें से कोई नटराजन के बाएं हाथ की विविधता और विशेषज्ञ डेथ बॉलिंग की जगह आसानी से ले लेगा।
सपाट पिच पर सही यॉर्कर डालना या गेंद की रफ्तार कम करना मैच का नतीजा तय कर सकता है। दिल्ली ने ऐसी परिस्थितियों के लिए एक अनुभवी विकल्प हटा दिया है। अब किसी दूसरे गेंदबाज को यह जिम्मेदारी संभालनी होगी।
मिचेल स्टार्क और लुंगी एनगिडी विदेशी तेज गेंदबाजी के विकल्प हैं, लेकिन उन पर ज्यादा निर्भरता टीम चयन पर दबाव बढ़ाएगी। उनकी फिटनेस या उपलब्धता में कोई समस्या आने पर भरोसेमंद भारतीय विशेषज्ञ की जरूरत और ज्यादा महसूस होगी।
कुलदीप यादव और अक्षर पटेल के मुख्य स्पिन विकल्प होने के कारण नए ट्रेड से आए जीशान अंसारी को प्लेइंग इलेवन में मौका मिलना भी मुश्किल है। उनके आने से डेथ बॉलिंग की कमी दूर नहीं होती।
दिल्ली ने दुर्लभ कौशल वाले एक मैच विनर को जाने दिया और बदले में ऐसा गेंदबाज लिया, जो शायद खेले भी नहीं। इस ट्रेड का फैसला यही है—और यह एक चौंकाने वाला कदम है।
